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ब्रोन्कियल ट्यूमर एक ऐसी स्थिति है जिसमें ट्यूमर ब्रोन्कियल ट्यूबों में बनते हैं। ब्रोन्कियल ट्यूमर होने का जोखिम सिगरेट पीने (सक्रिय और निष्क्रिय दोनों) से जुड़ा हुआ है।
ब्रोन्कियल ट्यूमर एक ऐसी स्थिति है जिसमें ट्यूमर ब्रोन्कियल ट्यूबों में बनते हैं। ब्रोन्कियल ट्यूब श्वासनली को लंग्ज (फेफड़ों) से जोड़ती हैं और लंग्ज (फेफड़ों) से हवा को अंदर और बाहर आने जाने देती हैं। ब्रोन्कियल ट्यूमर के कारण सांस लेने में कठिनाई होने लगती है और जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, वैसे ट्यूमर आस-पास के अंगों में फैलने लगता है।
ब्रोन्कियल ट्यूमर होने का जोखिम सिगरेट पीने (सक्रिय और निष्क्रिय दोनों) से जुड़ा हुआ है।
ब्रोन्कियल ट्यूमर के विभिन्न प्रकार निम्नलिखित हैं:
बच्चों में पाए जाने वाले ब्रोन्कियल ट्यूमर के 80% मामलों में एंडोब्रोन्कियल ट्यूमर होते हैं।
ये ब्रोन्कियल ट्यूमर का दुर्लभ रूप है जो सौम्य और घातक हो सकता है।
ये ट्यूमर कम आम और सौम्य होते हैं जो निप्पल जैसे या उंगली जैसे फ्रान्ड में बढ़ते हैं।
आमतौर पर सौम्य, इन्फ्लैमटोरी स्यूडोट्यूमर नियोप्लाज्म के जैसे ही होते हैं और दुर्लभ मामलों में होते हैं।
इसे फाइब्रॉएड भी कहा जाता है, लेयोमायोमास ब्रोंकी की परत में चिकनी मांसपेशियों के ऊतकों से बनता है। ये दुर्लभ मामलों में होते हैं।
ब्रोन्कियल म्यूकस ग्लैंड (श्लेष्मा ग्रंथी) से उत्पन्न होते हैं और ज्यादातर मामलों में सौम्य होते हैं। म्यूकस ग्लैंड (श्लेष्मा ग्रंथी) के ट्यूमर दुर्लभ होते हैं।
ये ट्यूमर नियोप्लाज्म हैं जो ग्लोमस कोशिकाओं (सेल्स) में शुरू होते हैं। ये ज्यादातर सौम्य होते हैं और दुर्लभ मामलों में होते हैं।
ये म्यूकस ग्लैंड्स (श्लेष्मा ग्रंथियों) और लंग (फेफड़े) की नलिकाओं, श्वासनली और लार ग्रंथियों से उत्पन्न होते हैं। ब्रोन्कियल एडेनोमा कैंसरयुक्त हो सकता है और शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है।
ये लंग (फेफड़े) के न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर होते हैं, जो धीमी गति से बढ़ते हैं और असामान्य होते हैं।
ब्रोन्कियल ट्यूमर के शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं और अक्सर कम गंभीर स्वास्थ्य स्थितियों से जुड़े होते हैं। ब्रोन्कियल ट्यूमर के लक्षण निम्नलिखित हैं:
ऐसे कई कारक हैं जो ब्रोन्कियल ट्यूमर के विकास के बढ़ते जोखिम से जुड़े हुए हैं। ब्रोन्कियल ट्यूमर के जोखिम कारक निम्नलिखित हैं :
तम्बाकू या सिगरेट में कम से कम 60 कार्सिनोजेनिक रसायन होते हैं जो कई प्रकार के कैंसर के जोखिम को बढ़ाते हैं। सक्रिय और निष्क्रिय दोनों तरह के धूम्रपान को ब्रोन्कियल ट्यूमर के जोखिम को बढ़ाने के कारक के रुप में पाया गया हैं।
एस्बेस्टस, सल्फेट एरोसोल, कोयले के धुएं और अन्य हानिकारक रसायनों के संपर्क में आने से ब्रोन्कियल ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है। रेडॉन के संपर्क को भी इस बीमारी के लिए एक जोखिम कारक माना जाता है।
यह बताया गया है कि लगभग 8 - 14% ब्रोन्कियल ट्यूमर आनुवंशिक रूप से विरासत में मिलते हैं।
ब्रोन्कियल ट्यूमर का पता लगाने और निदान करने के लिए कई परीक्षण हैं :
यदि ब्रोन्कियल ट्यूमर का संदेह होता है, तो स्पुतम साइटोलॉजी की सिफारिश की जा सकती है जिसमें थूक या कफ की जांच की जाती है।
ट्यूमर मार्कर्स जो ब्रोन्कियल ट्यूमर के लिए विशिष्ट होते हैं उनका पता लगाने के लिए रक्त परीक्षण किया जाता है । उपचार योजनाओं की सिफारिश करने से पहले मरीज़ के कुल स्वास्थ्य को समझने में भी रक्त परीक्षण विशेषज्ञों की सहायता करते हैं।
सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन और छाती का एक्स-रे जैसे इमेजिंग टेस्ट ट्यूमर का पता लगाने में मदद करते हैं। ये परीक्षण विशेषज्ञों को ट्यूमर का सटीक स्थान, आकार और विस्तार जैसे विवरण प्रदान करने में भी मदद करते हैं, जो उपचार योजना के लिए आवश्यक होते हैं।
ब्रोंकोस्कोपी के दौरान, ट्यूमर के विकास के लक्षणों का पता लगाने के लिए एक फाइबर ऑप्टिक व्यूइंग ट्यूब (ब्रोंकोस्कोप) को गले के माध्यम से श्वासनली और लंग्ज (फेफड़ों) के वायुमार्ग में डाला जाता है।
एक निश्चित निदान के लिए बायोप्सी की आवश्यकता होती है क्योंकि यह न केवल निदान की पुष्टि करने में मदद करती है बल्कि ट्यूमर की प्रकृति जैसे अतिरिक्त विवरण प्रदान करने में भी मदद करती है। ब्रोन्कियल ट्यूमर के लिए बायोप्सी निम्नलिखित तरीकों से की जाती है :
यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें ब्रोंकोस्कोपी के दौरान ऊतक के छोटे से नमूने को काटकर निकाला जाता है और माइक्रोस्कोप के नीचे उसकी जांच की जाती है।
यह प्रक्रिया तब की जाती है जब ट्यूमर तक पहुंचना मुश्किल हो या ट्यूमर अंग की परिफरी (बाह्य सतह) में स्थित हो। प्रक्रिया के दौरान, ऊतक का नमूना लेने के लिए पसलियों के बीच एक लंबी सुई डाली जाती है।
इस प्रक्रिया के दौरान छाती की कैविटी में मौजूद अंगों तक पहुंचने और उनका निरीक्षण करने के लिए छाती की दीवार में एक चीरा लगाया जाता है। यह प्रक्रिया दुर्लभ मामलों में की जा सकती है जिन मामलों में न तो फाइन - नीडल बायोप्सी और न ही ट्रान्सथोरासिक नीडल बायोप्सी रोग के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान कर सकती है।
ब्रोन्कियल ट्यूमर के लिए उपचार के विकल्पों की सिफारिश करने से पहले ट्यूमर के प्रकार, उसके चरण, ग्रेड, मरीज़ की उम्र और मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति जैसे कई कारकों को ध्यान में रखा जाता है। ज्यादातर मामलों में, ब्रोन्कियल ट्यूमर को सौम्य ट्यूमर के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, और इसलिए, सर्जरी उपचार की मुख्य पंक्ति होती है।
सर्जरी ट्यूमर और उसके आसपास के स्वस्थ ऊतकों के छोटे से हिस्से को निकाल देती है। ब्रोन्कियल ट्यूमर के लिए उपलब्ध विभिन्न सर्जिकल प्रबंधन विकल्पों में शामिल हैं:
यह एक प्रक्रिया है जिसमें उस वायुमार्ग को निकालना शामिल है जिसमें ट्यूमर होता हैं।
इसमें लंग (फेफड़े) के ट्यूमर वाले हिस्से को निकालना शामिल है।
यह प्रक्रिया लंग (फेफड़े) के उस छोटे वेज को निकाल देती है जहां ट्यूमर का विकास पाया जाता है।
इस प्रक्रिया में जहां ट्यूमर का विकास देखा गया है, लंग (फेफड़े) के उस लोब को निकालना शामिल है ।
यह एक मिनिमली - इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) प्रक्रिया है जिसके दौरान लेजर तकनीक का उपयोग करके ब्रोन्कोस्कोप की मदद से ट्यूमर को निकाल दिया जाता है।
रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) ट्यूमर को नष्ट करने के लिए हाई डोस रेडिएशन बीम (उच्च-खुराक विकिरण किरणों) का उपयोग करती है। आज कल उन्नत तकनीक के माध्यम से, विशेषज्ञ आसपास के स्वस्थ ऊतकों को होने वाले नुकसान को कम कर सकते हैं। बेहतर नैदानिक परिणामों के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) को अक्सर सर्जरी और कीमोथेरेपी के साथ संयोजित किया जाता है।
ब्रोन्कियल ट्यूमर के लिए कीमोथेरेपी भी उपचार विकल्पों में से एक है। ट्यूमर कोशिकाओं (सेल्स) को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी को मौखिक रूप से या इन्ट्रवीनस्ली (नस के माध्यम से) प्रशासित किया जा सकता है। दिए गए उपचार की समग्र प्रभावकारिता को बढ़ाने के लिए रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) की तरह, कीमोथेरेपी को अक्सर अन्य उपचार विधियों के साथ संयोजित किया जाता है।
ब्रोन्कियल ट्यूमर उपचार योग्य हैं। ब्रोन्कियल ट्यूमर के लिए विभिन्न उपचार विकल्प उपलब्ध हैं। फिर भी, प्रारंभिक पहचान महत्वपूर्ण होती है। ब्रोन्कियल ट्यूमर का जल्दी पता लगाने से न केवल सकारात्मक नैदानिक परिणामों की संभावना बढ़ जाती है बल्कि उपचार के बाद जीवन की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
एक मरीज को होने वाले संभावित दुष्प्रभाव उसकी उपचार योजना (सर्जरी / कीमोथेरेपी / रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा)) और जिस चरण पर रोग का निदान हुआ है और उसका इलाज किया जाता है उसपर निर्भर करते हैं। ब्रोन्कियल ट्यूमर के उपचार के संभावित दुष्प्रभावों में थकान, दर्द, खांसी, सांस लेने में कठिनाई, रक्त के थक्के, रक्तस्राव, मतली, उल्टी, भूख न लगना, मुंह के छाले, त्वचा में जलन आदि शामिल हैं। जैसा कि पहले वर्णन किया गया है, हर मरीज़ में देखे जाने वाले दुष्प्रभाव अलग अलग हो सकते हैं। इसलिए, मरीज़ों के लिए उपचार के संभावित दुष्प्रभावों और उन्हें प्रबंधित करने के तरीकों को जानने के लिए अपने डॉक्टर से बात करना महत्वपूर्ण है।
रिकवरी (स्वास्थ्य लाभ) की अवधि हर मरीज़ में अलग अलग होती है क्योंकि प्रत्येक मरीज़ का एक अलग उपचार योजना के साथ इलाज किया जाता है। कुछ मरीज़ों को सिर्फ सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है, जबकि कुछ मरीज़ों को सर्जरी और कीमोथेरेपी सत्रों की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए, अपने डॉक्टर से बात करना सबसे अच्छा होता है, जो आपको उपचार प्रोटोकॉल, ठीक होने में लगने वाले समय और आपकी समग्र रिकवरी (स्वास्थ्य लाभ) प्रक्रिया को तेज करने के उपायों को समझने में मदद कर सकते हैं।
हां, ब्रोन्कियल ट्यूमर के लिए धूम्रपान सबसे बड़े जोखिम कारकों में से एक है। अध्ययनों में पाया गया है कि सक्रिय और निष्क्रिय (सेकंड हैंड) धूम्रपान दोनों ही ब्रोन्कियल ट्यूमर का कारण बन सकते हैं।
ब्रोन्कियल ट्यूमर के विकास के जोखिम को कम करने में आपकी मदद करने वाले कुछ तरीकों में धूम्रपान छोड़ना और हानिकारक रसायनों और रेडीओऐक्टिव पदार्थों के संपर्क में कम से कम आना शामिल है।